भैरू बिलमायो रे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

भैरू बिलमायो हाय कल्लाड़ी नथंली म डोलर हिंडो घाल कल्लाड़ी,

भैरू बिलमायो रे...

काहे म बुआ दू डोडा ऐ आहे कल्लाड़ी,

काहे म बुआ दू भुरड़ी भाग कल्लाड़ी,

भैरू बिलमायो रे......

धोरा म बुआ दु डोडा ऐ आहे कल्लाड़ी,

आंगणीय बुआ दू भुरड़ी भांग कल्लाड़ी,

भैरू बिलमायो रे......

काहे से सिचा दू डोडा ऐ आहे कल्लाड़ी,

काहे से सिचा दू भुरड़ी भांग कल्लाड़ी,

भैरू बिलमायो रे......

पाणीड़ सिचा दू डोडा ऐ आहे कल्लाड़ी,

दुधड़ सिचा दू भुरड़ी भाग कल्लाड़ी,

भैरू बिलमायो रे......

काहे से निनाणु डोडा ऐ आहे कल्लाड़ी,

काहे से निनाणु भुरड़ी भांग कल्लाड़ी,

भैरू बिलमायो रे......

कसिया निनाणु डोडा ऐ आहे कल्लाड़ी,

हाथा स्यू निनाणु भुरड़ी भांग कल्लाड़ी,

भैरू बिलमायो रे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।