सिया राम सिया राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सिया मुखबिर पर मुस्कान छोड़ें,

जो राम दरस मिल जाएं,

सिया राम नाम से बनी है जोगन,

राम नाम की कहाये,

जिसे प्रीति बस राम से,

उसका लाज रख इक ना,

राम सिया राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम…………..

मंगल भवन अमंगल हारी,

द्रभु सुदशरथ अजिर बिहारी,

राम सिया राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम………

श्रृंगार सिया का राम सिया,

रघुवर का वाम कहा,

संग पिया चले सिया माटी ताके,

पथ जब राम दिखाये,

हृदय में ऐसे राम आधार,

हृदय में राम का धाम,

राम सिया राम सिया राम जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम……….

हरी अनंत कथा हरी कथा अनंत,

कहहि सुनहि बहु विधि सब संता,

राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम………….

नख सेष का सुन्दर रूप राम का,

राम जगत कहलाये,

संग सिया के शोभित रघुनन्दन,

संग संग सिया राम कहाये,

बोले भी सोम बने जब मुख,

जापे बस राम का नाम,

राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम………….

जा पर कृपा राम की होई,

ता पर कृपा करहु सब कोई,

राम सिया राम सिया राम जय जय राम,

सीता राम चरित अति पावन,

मधुर सरस और अति मनभवन,

राम सिया राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम सिया राम जय जय राम……

सिया मुखबिर पर मुस्कान छोड़ें,

जो राम दरस मिल जाएं,

सिया राम नाम से बनी है जोगन,

राम नाम की कहाये,

जिसे प्रीति बस राम से,

उसका लाज रख इक ना,

राम सिया राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम…………

मंगल भवन अमंगल हारी,

द्रभु सुदशरथ अजिर बिहारी,

राम सिया राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम………

श्रृंगार सिया का राम सिया,

रघुवर का वाम कहा,

संग पिया चले सिया माटी ताके,

पथ जब राम दिखाये,

हृदय में ऐसे राम आधार,

हृदय में राम का धाम,

राम सिया राम सिया राम जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम……….

हरी अनंत कथा हरी कथा अनंत,

कहहि सुनहि बहु विधि सब संता,

राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम………….

नख सेष का सुन्दर रूप राम का,

राम जगत कहलाये,

संग सिया के शोभित रघुनन्दन,

संग संग सिया राम कहाये,

बोले भी सोम बने जब मुख,

जापे बस राम का नाम,

राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम जय जय राम………….

जा पर कृपा राम की होई,

ता पर कृपा करहु सब कोई,

राम सिया राम सिया राम जय जय राम,

सीता राम चरित अति पावन,

मधुर सरस और अति मनभवन,

राम सिया राम सिया राम जय जय राम,

सिया राम सिया राम सिया राम जय जय राम……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।