कुछ पाने के खातिर तेरे दर

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

कुछ पाने के खातिर तेरे दर हम भी झोली फलाये हुए है,

यहाँ झोली सभी की है भरती इसलिए हम भी आये हुए है,

हो गुनागार जितना भी कोई हिसाब माँगा न तुमने किसी से,

तुमने ओलादे अपनी समज के सबके अवगुण छुपाये हुए है,

जिसपे हो जाये रहमत तुम्हारी मौत के मुह से उसको बचा लो,

तुमने लाखो हजारो के बड़े डूबने से बचाए हुए है,

कुछ पाने के खातिर तेरे .......

तुमने सबकुछ जहान में बनाया चाँद तारे जमीन असमान भी,

चलते फिरते ये माटी के पुतले तूने खूब सजाये हुए है,

कुछ पाने के खातिर तेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।