सतसंग में जाण ते हटाइये मत ना

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॥ पावन पाठ ॥

सतसंग में जाण ते हटाइये मत ना,

सतसंग में जाण ते हटाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना.....

घर भी तेरा, कोठी भी तेरी,

घर भी तेरा, कोठी भी तेरी,

तू कोणे में खाट बगाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना.....

भैंस भी तेरी गऊ भी तेरी,

भैंस भी तेरी गऊ भी तेरी,

तू दूध पे राड़ जगाइए मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना......

बेटा मेरा आदमी तेरा,

बेटा मेरा आदमी तेरा,

बेटे ते मन पडवाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना.....

अन्न भी तेरा धन भी तेरा,

अन्न भी तेरा धन भी तेरा,

दान करण ते हटाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना.....

पोता मेरा है बेटा तेरा,

पोता मेरा है बेटा तेरा,

तू लाड करन ते हटाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना......

दरवाजे पे है मंगता आजा,

दरवाजे पे है मंगता आजा,

कदी खाली हाथ खंदाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना......

जद मेरा टाइम आखिरी आजा,

जद मेरा टाइम आखिरी आजा,

बेटे ने दूर खंदाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना.....

सतसंग में जाण ते हटाइये मत ना,

सतसंग में जाण ते हटाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना,

मेरा मान बहू तू घटाइये मत ना......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।