नहाँ धोके मै बैठी भगतणी भजे राम की माला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नहाँ धोके मै बैठी भगतणी, भजे राम की माला,

भेष बदल कै कृष्ण आग्या, बण के माँगन आला......

चिमटा ठा कै भाजी भगतणी, ठहर जा माँगण आला,

मेरी भक्ति में भंग गेर दिया, मै फेरूँ थी माला,

नहाँ धोके मै बैठी भगतणी, भजे राम की माला,

रे रहण दे भगतणी जाण दे भगतणी, झूठी फेरे माला,

उपरले तै राम रटे है तेरे भितरले में काला,

नहाँ धोके मै बैठी भगतणी, भजे राम की माला.....

राम रटया ध्रुव भगत नै, उमर का था वो याला,

अरे धजा चढ़ी आकाश में, दुनिया में होया उजाला

रे रहण दे भगतणी जाण दे भगतणी झूठी फेरे माला

उपर ले तै राम रटे है तेरे भितरले में काला,

नहाँ धोके मै बैठी भगतणी, भजे राम की माला......

राम रट्या था मीरा बाई ने, बण में ल्या लिया डेरा।

आठ सौ झाल त्याग दिए, ओने लेई काठ की माला

रे रहण दे भगतणी जाण दे भगतणी झूठी फेरे माला

उपर ले तै राम रटे है तेरे भितरले में काला

नहाँ धोके मै बैठी भगतणी,भजे राम की माला......

राम रट्या था धन्ना भगत ने, बीज बाँट दिया सारा,

बोई काँकर काटे तूम्बे, अन्न उपज्या था अपारा,

रे रहण दे भगतणी जाण दे भगतणी,

रे रहण दे भगतणी जाण दे भगतणी, झूठी फेरे माला,

उपर ले तै राम रटे है तेरे भितरले में काला

नहाँ धोके मै बैठी भगतणी,भजे राम की माला.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।