मंदिर जा मस्त जवानी में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भजन कर मस्त जवानी में,

बुढ़ापा किसने देखा है....

पैर से लंगड़े हो जाओगे, मंदिर नही तुम जा पाओगे,

मंदिर जा मस्त जवानी में, बुढ़ापा किसने देखा है......

आंख से अंधे हो जाओगे, दर्सन नही तुम कर पाओगे,

दर्सन कर मस्त जवानी में, बुढ़ापा किसने देखा है......

कान से बहरे हो जाओगे, भजन नही तुम सुन पाओगे,

भजन सुन मस्त जवानी में, बुढ़ापा किसने देखा है......

हाथ से लुल्हे हो जाओगे, दान नही तुम कर पाओगे,

दान कर मस्त जावनी में, बुढ़ापा किसने देखा है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।