वरधान मुझे दो बाबा शिर्डी के साईं नाथ

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे हाथो में चूड़ी खनके सथो जनम तक रहू पिया के मैं तो बाबा साथ,

वरधान मुझे दो बाबा शिर्डी के साईं नाथ ,

तेरी बबुती अमृत जैसी जो हर रोग मिटाए,

देदो मुझको हाथो से अपने बाबा तेरा क्या जाये,

मेरे पाओ में विषिया दमके पाजेब रेशमी छन छन छमके,

सात जनम तक लाल चुनरिया सजती रही मेरी माथ,

वरधान मुझे दो बाबा शिर्डी के साईं नाथ ..

पार बरम बर्म ब्रमांड के नायक कहती दुनिया सारी,

हाथ पसारे दवार खड़ी हु महकादो फुलवाड़ी,

मेरी गोदी में मचले ललना ग्यारा बचनो से तुम मत तलना,

सात जनम तक मेरे सिर पे बाबा तेरा हो हाथ,

वरधान मुझे दो बाबा शिर्डी के साईं नाथ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।