लाख चौरासी जीया जून में नाचै दुनियां सारी

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लाख चौरासी जीया जून में नाचै दुनियां सारी,

नाचण मैं के दोष बता या अक्कल की हुशियारी.....

सबतैं पहलम विष्णु नाच्या पृथ्वी ऊपर आकै,

फिर दूजै भस्मासुर नाच्या सारा नाच नचा कै,

गौरां आगै शिवजी नाच्या, ल्याया पार्वती नै ब्याह-कै,

जल के ऊपर ब्रह्मा नाच्या कमल फूल के मांह-कै,

ब्रह्मा जी नै नाच-नाच कै रची सृष्टि सारी.....

गोपियों में कृष्ण नाच्या करकै भेष जनाना,

विराट देश में अर्जुन नाच्या, करया नाचना गाणा,

इंद्रपुरी में इन्द्र नाचै जब हो मींह बरसाणा,

गढ़ मांडव में मलके नाच्या करया नटों का बाणा,

मलके नै भी नाच-नाच कै ब्याहली राजदुलारी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।