कलयुग बोल्या परीक्षित ताहीं

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॥ पावन पाठ ॥

कलयुग बोल्या परीक्षित ताहीं, मेरा ओसरा आया,

अपने रहण की खातिर मन्नै इसा गजट बणाया॥

सोने कै काई ला दूंगा, आंच साच पै कर दूंगा,

वेद-शास्त्र उपनिषदां नै मैं सतयुग खातिर धर दूंगा,

असली माणस छोडूं कोन्या, सारे गुंडे भर दूंगा,

साच बोलणियां माणस की मैं रे-रे-माटी कर दूंगा,

धड़ तैं सीस कतर दूंगा, मेरे सिर पै छत्र-छाया,

अपने रहण की खातिर मन्नै इसा गजट बणाया ॥

मेरे राज मैं मौज करैंगे ठग डाकू चोर लुटेरे,

ले-कै दें ना, कर-कै खां ना, ऐसे सेवक मेरे,

सही माणस कदे ना पावै, कर दूं ऊजड़-डेरे,

पापी माणस की अर्थी पै जावैंगे फूल बिखेरे,

ऐसे चक्कर चालैं मेरे मैं कर दूं मन का चाहया,

अपने रहण की खातिर मन्नै इसा गजट बणाया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।