ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

पारंपरिक
माता दुर्गा मंत्र दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे llll

ये मंत्र है, मां चामुण्डा का,

इस में मां, शक्ति समाती है,

हर इक चिंता, हर इक बाधा,

"इसे जपने से, मिट जाती है" l

नहीं बाल भी बांका, हो उसका ll

जो सुमिरे इसे ,मन से सच्चे,,,

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे llll

जब चंड-मुंड महिषासुर का,

इस धरती पर आंतक मचा,

सबको ही सताया असुरों ने,

"कोई भक्त ना साधू संत बचा" ll

तब तुम्हें पुकारा था मईया ll

अब संकट में तेरे बच्चे,,,

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

मां दुर्गति-हारिणी दुर्गे ने,

सदा धर्म का साथ निभाया है,

जब-जब धरती पर पाप बढ़ा,

"मां ने त्रिशूल उठाया है" ll

दुष्टों का रक्त पिए काली ll

और खा गई दुष्टों को कच्चे,,,

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

हे नमन तुम्हें मां जगदम्बे,

हे नमन तुम्हें मईया काली,

ना तुमसा कोई और हुआ,

"तूँ ही सब से शक्तिशाली" ll

*तूँ दया-दृष्टि हम पर रखना ll

हम सभी तो हैं तेरे बच्चे,,,

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।