हर कदम पर मौत मंडराये

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॥ पावन पाठ ॥

हर कदम पर मौत मंडराये, भजन करलो जरा,

जाने कब किसकी बारी आये, भजन करलो जरा,

हर कदम पर मौत....

जो भी जैसा भी करम करता यहां पर,

उसको वैसा ही फल मिलता यहां पर,

उसको वैसा ही2फल मिलता मिलता है यहां पर,

बात तेरी वहां बन जाये,भजन करलो जरा,

जाने कब किसकी बारी.....

मौत जब आये बन ठन के दुल्हनियां,

तुझको दूल्हा भी बनायेगी ये दुनियां,

तुझको दूल्हा भी2बनायेगी बनायेगी ये दुनियां,

उससे पहले सेहरा बंध जाये,भजन करलो जरा,

जाने कब किसकी बारी.....

काहे बंदे तू करे नादानी है,

तेरी काया भी राख हो जानी है,

खत्म हो होगी2एक दिन तेरी कहानी है,

कैद तस्वीर में हो जाये,भजन करलो जरा,

जाने कब किसकी बारी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।