ओ मेरे हनुमंता

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेरे हनुमंता, हनुमंता हनुमंता,

संजीवन बूटी ला, भईया के प्राण बचा,

पर देख तू जो बूटी नहीं लाएगा,

सुबह होते ही लखन का ये तन बिखर जायेगा.....

भईया की मूर्छा मेरे प्राण ले ली गी,

सुन ले गी मैया तो वो जान दे देगी,

मैं तो मर जाऊगा वापिस न जाऊगा,

लक्ष्मण सा भाई खोकर क्या मुँह दिखलाऊंगा,

जाओ जाओ बूटी लाओ,

बूटी आने से काम बन जायेगा,

सुबह होते ही लखन का ये तन बिखर जायेगा........

पूछेगी मैया तो मैं क्या बतलाऊगा,

आये थे तीन अकेला कैसे जाउगा,

मारेंगे ताने लोग क्या करके आया है,

नारी के बदले तूने भाई मरवाया है,

जाओ जाओ बूटी लाओ,

बूटी आने से काम बन जायेगा,

सुबह होते ही लखन का ये तन बिखर जायेगा..........

बूटी को लेने हनुमान गए है,

रस्ते में काल को भी मार गिराए है,

सोनागिरी जा के पहुचे बूटी ना पायी है,

हनुमत ने ध्यान लगाया युक्ति तब आयी है,

ठाओ ठाओ पर्वत उठाओ,

पर्वत उठाने से काम बन जायेगा,

सुबह होते ही लखन का ये तन बिखर जायेगा.........

बूटी को लेके हनुमान आये है,

लक्ष्मण को छोड़ राघव गले लगाए है,

बूटी फिर घोल पिलाई मूर्छा को त्यागा है,

राम ने गले लगाया जब लक्ष्मण जागा है,

भैया भैया लक्ष्मण भैया,

तेरे उठने से रावण मर जायेगा,

ये धरती का बोझ उतर जायेगा.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।