वन चले राम रघुराई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

वन चले राम रघुराई,

संग उनके सीता माई,

राजा जनक की जाई।।

आगे आगे राम चलत हैं,

पीछे लक्ष्मण भाई,

बीच में उनके चले जानकी,

तीनो लोक की मायी,

वन चले राम रघुराई,

संग उनके सीता माई,

राजा जनक की जाई।

राम बिना म्हारी सूनी अयोध्या,

लखन बिना ठकुराई,

सीता बिना म्हारों सूनी रसोई

कौन करे चतुराई,

वन चले राम रघुराई,

संग उनके सीता माई,

राजा जनक की जाई।

सावन बरसे भादो गरजै,

पवन चले पुरवाई

कौन वृक्ष नीचे भीजत होंगे

राम लखन सीता माई

वन चले राम रघुराई,

संग उनके सीता माई,

राजा जनक की जाई।

रावण मार राम घर आए,

घर घर बटत बधाई,

सुर नर मुनि जन करे आरती,

तुलसी दास जस गाई

वन चले राम रघुराई,

संग उनके सीता माई,

राजा जनक की जाई।

भरत कुमार दवथरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।