लगाया त्रिलोकपुर दरबार मेरी मां बाला सुन्दरी ने

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

लगाया त्रिलोकपुर दरबार मेरी मां बाला सुन्दरी ने,

मेरी मां बाला सुन्दरी ने मेरी मां बाला सुन्दरी ने,

लगाया त्रिलोकपुर दरबार मेरी मां बाला सुन्दरी ने....

रामदास पे कृपा कर मां त्रिलोकपुर में आई,

सपने में फिर दर्शन देके लीला अजब दिखाई,

बढ़ाया रामदास का मान मेरी मां बाला सुन्दरी ने,

लगाया त्रिलोकपुर दरबार मेरी मां बाला सुन्दरी ने.....

बाल रूप में बाला सुन्दरी मैया लगती प्यारी,

सुन्दर भवन निराला माँ का महिमा जग से न्यारी,

कर दिया दर्शन से कल्याण मेरी माँ बाला सुन्दरी ने,

लगाया त्रिलोकपुर दरबार मेरी मां बाला सुन्दरी ने.....

बाँझन को माँ पुत्र देती अज्ञानी को ज्ञान,

निर्धन भी दर इसके आकर बन जाता धनवान,

दिलाई सिंगला को पहचान मेरी माँ बाला सुन्दरी ने,

लगाया त्रिलोकपुर दरबार मेरी मां बाला सुन्दरी ने......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।