गोकुल का ग्वाला बरसाने की राधा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोकुल का ग्वाला बरसाने की राधा,

छोड़ कलाई साँवरे,

मत कर तू हुड़दंग,

तेरा मेरा मेल ना,

मत डारे मोपे रंग,

तू काला काला मैं गोरी गोरी साँवरे,

कैसे खेलु तेरे संग होली साँवरे.....

तू काला काला मैं गोरी गोरी साँवरे,

कैसे खेलु तेरे संग होली साँवरे।

तू तो है छलिया महा रंग रसिया,

मैं हूँ रे गाँव की गौरी साँवरे,

तू काला काला मैं गोरी गोरी साँवरे,

अरे कैसे खेलूँ तेरे संग होली साँवरे………..

कान्हाँ तेरे काँधे पर कारी कामरियाँ,

रेशम की मेरी सतरंगी चुनरियाँ,

तू ग्वाला मैं चंदा की चकोरी साँवरे,

अरे कैसे खेलु तेरे संग होली साँवरे,

तू काला काला मैं गोरी गोरी सांवरे,

अरे कैसे खेलूँ तेरे संग होली साँवरे……..

मैं अपने महलों में खेलूँ कन्हैया,

दिन भर चराता फिरे तू तो गैया,

घर घर तू करे, माखन की चोरी साँवरे,

अरे कैसे खेलु तेरे संग होली साँवरे,

तू काला काला मैं गोरी गोरी साँवरे,

अरे कैसे खेलूँ तेरे संग होली साँवरे…….

काहे को तू मेरे पीछे रै,

रंग तेरा मुझपे एक भी चढ़े रे,

काहे को करे तू सीना जोरी साँवरे,

अरे कैसे खेलु तेरे संग होली साँवरे,

तू काला काला मैं गोरी गोरी साँवरे,

अरे कैसे खेलूँ तेरे संग होली साँवरे……….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।