भिलनी नचे ते भंगड़े पावे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भिलनी नचे ते भंगड़े पावे,

अज मेरे राम ने आना है,

अज मेरे राम ने आना ऐ,

मेरे भगवान ने आना ऐ.....

दौडी नदी दे वल जावे,

ओथो गंगाजल लैयावे,

ओथो गंगाजल लैयावे,

राम नू स्नान कराना ऐ.....

दौडी जंगल दे वल जावे,

ओथो कुशा तोड लैयावे,

ओथो कुशा तोड लैयाऐ,

राम दा आसन लाना ऐ.....

दौडी बागा दे वल जावे,

ओथो फुल तोड लैयाऐ,

ओथो फुल तोड लैयाऐ,

राम नू हार पवाना ऐ.....

दौडी जंगल दे वल जावे,

ओथो बेर तोड लैयाऐ,

ओथो बेर तोड लैयाऐ,

राम नू भोग लगाना ऐ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।