बाबा साईं की सवारी आ गई

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॥ पावन पाठ ॥

रूठी किस्मत बनाने की बारी आ गई,

अपनी दुनिया सजाने की बारी आ गई,

जल्दी चलो न सजन साईं बाबा की सवारी आ गई,

सरपे उपर मुक्त सजा है दूल्हा बन गये साईं,

कंधो पर डोला है सोहे गूंज रही शहनाई,

एसे फूटे पटके दिवाली आ गई,

जल्दी चलो न सजन साईं बाबा की दिवाली आ गई,

साईं बाबा की सवारी आ गई.....

शिर्डी ले जाने का वाधा जाने कब हो पूरा,

बाबा के दर्शन का सपना रह जाये न अधुरा,

कहे मन हर दवार शिर्डी साईं आ गई,

जल्दी चलो न सजन साईं बाबा की सवारी आ गई.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।