हो जा राम का दीवाना बंदे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल,

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल,

ना कर टालम टोल बन्दे,

ना कर टालम टोल,

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल……….

प्रेम के भूखे राम ने देखों,

शबरी की झूठन खाई,

ऐसा करके राम ने खुद की,

जग में शोभा बढ़ाई,

बंदे न कर टालमल टोल,

ना कर टालम टोल बन्दे,

ना कर टालम टोल,

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल………

क्या क्या करतब किए राम ने,

क्या क्या खेल दिखाए,

अहिल्या को भी तार दिया,

जब अपने पैर छुआए,

बंदे न कर टालमल टोल,

ना कर टालम टोल बन्दे,

ना कर टालम टोल,

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल……..

आजा उसकी शरनी में,

ना कर तू आना कानी,

मौज़ बहारें देख के तुझको,

होगी बड़ी हैरानी,

बंदे न कर टालमल टोल,

ना कर टालम टोल बन्दे,

ना कर टालम टोल,

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल,

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल,

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल,

ना कर टालम टोल बन्दे,

ना कर टालम टोल,

हो जा राम का दीवाना,

बंदे न कर टालमल टोल………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।