सपने में आई अम्बे माँ

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरे सपने में आईं अम्बे मात गजब करामात हो गई,

मेरे ज्ञान के खुले कपाट गजब करामात हो गई,

गजब करामात हो गई, गजब करामात हो गई ,

मेरे सपने में आईं अम्बे मात गजब करामात हो गई......

शेर पे सवार होकर मैय्या मेरी आईं,

मेरी मैय्या आईं मुझे बेटा बुलाईं,

मेरी माता ने२ की मुझसे बात गजब करामात हो गई,

मेरे सपने में आईं अम्बे मात गजब करामात हो गई………..

मेरी एक टेर पे वो दौड़ी चली आईं,

दौड़ी चली आईं मां विलंब न लाईं,

मां ने हरदम दियो मेरो साथ गजब करामात हो गई,

मेरे सपने आईं अम्बे मात गजब करामात हो गई…….

मेरी माता के रूप हैं निराले कोई कुष्मांडा कोई गौरा पुकारे,

नवरातों में किया उनका ध्यान गजब करामात हो गई,

मेरे सपने में आईं अम्बे मात गजब करामात हो गई……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।