मेंहरा करदें प्यारें

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॥ पावन पाठ ॥

मेंहरा करदें प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

झोलियाँ भरदें, प्यारें,मेरे गुरुमहाराज,

मेरे गुरुमहाराज, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें,प्यारें, मेरे गुरुमहाराज.....

मेंहरा वालयाँ, मेंहर तेरी दां, अंत ना कोई पाया,

डिगदें होयें नूँ दाता जी, अपने गलें लगाया,

अपने गलें लगाया, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें,प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

झोलियाँ भरदें, प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

मेरे गुरुमहाराज, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें,प्यारें, मेरे गुरुमहाराज......

दाता तेरे द्वार दें झण्डे, सारे जग विच झुलदें,

जो वीं दर तें आ जान्दें, उसदें नसीबें खुल्लदें,

उसदें नसीबें खुल्लदें, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें,प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

झोलियाँ भरदें, प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

मेरे गुरुमहाराज, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें,प्यारें, मेरे गुरुमहाराज......

सतगुरु जी मैं हर वेलें बस, तेरे ही गुणं गावाँ,

तेरे नाम दी गंगा दें विच, रज-रज टूबियाँ लावाँ,

रज-रज टूबियाँ लावाँ, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें, प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

झोलियाँ भरदें, प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

मेरे गुरुमहाराज, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें,प्यारें, मेरे गुरुमहाराज.....

अपने प्यारें सतगुरु दीं, कि-कि कराँ वडयाई,

पल विच कटटन् दुख सारें, बोहती देर ना लाई,

बोहती देर ना लाई, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें, प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

झोलियाँ भरदें, प्यारें, मेरे गुरुमहाराज,

मेरे गुरुमहाराज, मेरे गुरुमहाराज,

मेंहरा करदें, प्यारें, मेरे गुरुमहाराज......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।