दादा अरदास लगाई

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॥ पावन पाठ ॥

मने अरदास लगाई, पूरी करो जी दादा देव,

पूरी दादा देव, करो जी पूरी दादा देव,

मने अरदास लगाई, पूरी करो जी दादा देव.......

कहते हैं जो शरण में आया, उसका बेड़ा पार हुआ,

संकट सभी मिटे छण में और , सेबक का उधार हुआ,

मेरी भी करो सुनाई,

पूरी करो जी दादा देव,

मने अरदास लगाई, पूरी करो जी दादा देव.......

थारा एक भरोशा भारी, म्हारे दादा देव सुनो,

कृपा कर दो पालम वाले, करू तुम्हारी सेब सुनो,

रही ना कोई कमाई,

पूरी करो जी दादा देव,

मने अरदास लगाई, पूरी करो जी दादा देव.......

आज समय है बड़ा बेदर्दी, देख्या ऐसा कभी नही,

दिन में भी हो रया अँधेरा, खोई है पहचान कही,

कष्ट में बनो सहाई,

पूरी करो जी दादा देव,

मने अरदास लगाई, पूरी करो जी दादा देव.......

दया के सागर दया करो, मेरी इच्छा पूरी कर दो,

खाली झोली लेके आया, कहे हरीश इसको भर दो,

ना हो भूलन रूसबाई,

पूरी करो जी दादा देव,

मने अरदास लगाई, पूरी करो जी दादा देव.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।