ॐ पितु माताय नमः

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ॐ पितु माताय नमः

ॐ श्री गुरुवे नमः

ॐ श्री माँ धराय नमः

ॐ गं गणपतये नमः

गुरु ब्रम्हा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा,

गुरुदेव साक्षात् परब्रम्ह, तस्मये श्री गुरुवे नमः

गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागो पाय,

बलिहारी गुरु आपणो, गोविन्द दियो बताये.....

प्रथम सुमरू गणपती, माँ गौरा के गणराज,

फिर सुमरु माँ शारदा, मेरी बनी रहे आवाज़.....

क्षमा करो मिल देव सब, कोई मुझसे हो जो भूल,

अर्पण करू स्वीकारियो, मेरी श्रद्धा के कुछ फूल.....

सदा भवानी दाहिनी, शन्मुख रहे गणेश,

पांच देव रक्षा करे, ब्रम्हा विष्णु महेश.....

ॐ पितु माताय नमः

ॐ श्री गुरुवे नमः

ॐ श्री माँ धराय नमः

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ श्री ब्रह्माये नमः

ॐ श्री विष्णवे नमः

ॐ श्री शिव शिवे नमः

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ श्री सरस्वतये नमः

ॐ श्री लक्ष्मये नमः

ॐ दुम दुर्गाये नमः

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ श्री भैरवाये नमः

ॐ श्री बटुकाये नमः

ॐ श्री हनुमतये नमः

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ श्री नवग्रहे नमः

ॐ श्री संतये नमः

ॐ सब भक्तये नमः

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ श्री रामाय नमः

ॐ श्री केशवाय नमः

दास श्याम श्री नमो नमः

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ पितु माताय नमः

ॐ श्री गुरुवे नमः

ॐ श्री माँ धराय नमः

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।