शिव की जटा से निकली गंगा

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव की जटा से निकली गंगा,

उसमें नहावे दुर्गे मात मैया का जवाब नहीं.....

माथे का टीका मैया आप समारो,

आप समारो मैया खुद ही समारो,

कहीं लहरों में बह ना जाए मैया का जवाब नहीं,

शिव की जटा से निकली गंगा......

माथे की बिंदी मैया आप समारो,

आप समारो मैया खुद ही समारो,

कहीं लहरों में बह ना जाए मैया का जवाब नहीं,

शिव की जटा से निकली गंगा......

गले का हारवा मैया आप समारो,

आप समारो मैया खुद ही समारो,

कहीं लहरों में बह ना जाए मैया का जवाब नहीं,

शिव की जटा से निकली गंगा......

कमर की तगड़ी मैया आप समारो,

आप समारो मैया खुद ही समारो,

कहीं लहरों में बह ना जाए मैया का जवाब नहीं,

शिव की जटा से निकली गंगा......

पैरो की पायल मैया आप समारो,

आप समारो मैया खुद ही समारो,

कहीं लहरों में बह ना जाए मैया का जवाब नहीं,

शिव की जटा से निकली गंगा......

तन की साड़ी मैया आप समारो,

आप समारो मैया खुद ही समारो,

कहीं लहरों में बह ना जाए मैया का जवाब नहीं,

शिव की जटा से निकली गंगा......

भोग के छोले मैया आप समारो,

आप समारो मैया खुद ही समारो,

कहीं लहरों में बह ना जाए मैया का जवाब नहीं,

शिव की जटा से निकली गंगा......

हम भगतो को मैया आप समारो,

आप समारो मैया खुद ही समारो,

कहीं लहरों में बह ना जाए मैया का जवाब नहीं,

शिव की जटा से निकली गंगा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।