राणा जी माेहे लागी लगन घनश्याम की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

थारी माया नगरी या काई काम की,

राणा जी माेहे लागी लगन घनश्याम की,

मै तो बावरी भई रे हरी नाम की,

राणा जी मोहे लागी लगन घनश्याम की.....

पायो राम रतन धन मोकडो,

अब यह झूठी माया को काई सोचनों,

ना भावे मने चूड़ा राणा ना ही काजल टीकी,

नटवर नागर आगे-आगे, सबरी चीजा फीकी.....

थारी माया नगरी या काई काम की,

राणा जी माेहे लागी लगन घनश्याम की.....

मैं तो लेके एक तारा नाचू जोर की,

मैं तो दरस दीवानी चितचोर की,

राणा ना कर तू बाता अज्ञान की,

राणा जी माेहे लागी लगन घनश्याम की.....

राणा भक्ति में शक्ति बड़ी भारी रेे,

रखा अमृत है नाम गिरधारी रे,

श्याम मीरा का मीरा घनश्याम की,

राणा जी माेहे लागी लगन घनश्याम की......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।