बनवारी गिरधारी अब राखो लाज हमारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बनवारी गिरधारी अब राखो लाज हमारी,

लाज ही है अब मुझ निर्धन की जीवन पूँजी सारी,

बनवारी गिरधारी............

सरे बाज़ार में आज ऐ बाबा लुट रही लाज हमारी,

चुप बैठे दीनो के नाथ तुम फिकर नहीं क्या हमारी,

अब तो हमको मोहन बस एक आस लगी है तुम्हारी,

बनवारी गिरधारी............

तेरे द्वार पे ओ सांवरिया आते है लाज के मारे,

मेरी लाज का तू रखवाला तुझको ही आज पुकारें,

तू भी जो अनसुनी करेगा कौन सुनेगा हमारी,

बनवारी गिरधारी............

रागी की लाज पे जब जब आई दौड़े हो तुम ही कन्हैया,

बिन पतवार के डूब गई जो दरश की लाज की नैया,

कहाँ गए तेरे मोहन पगली पूछेगी दुनिया सारी,

बनवारी गिरधारी............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।