जमना जी के तीर राम की सु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं भरण गई थी नीर राम की सु, जमना जी के तीर राम की सु.....

मटकी म्हारी फोड़ गया भेज गया नन्द लाल,

बीस तो उलाहने दिए कोना करी बंद गाल,

घागरे पे छीट लगी भीग गया कंद लाल,

ओ ओ ओ,,, हुए कपडे झीरमझिर राम की सु,

जमना जी के तीर राम की सु.....

घाट पे झमेला हो गया कठै हो गए नर नार,

गली दे के सामी बोला गबरा की पनहारी,

आगे आगे कृष्ण चले पाछे पाछे हम सारी,

ओ ओ ओ,, उड़े कट्ठी हो गी भीड़ राम की सु,

जमना जी के तीर राम की सु.....

हम त नुआ सोचे जा स और कोई गैर नहीं स ए,

भाइआ की सु इन बता में रेहणी खेर नहीं स ए,

म्हारी गैल्या बैर ला लिआ और कोई शहर नहीं स,

ओ ओ ओ,,, हम गुज्जर तू हीर राम की सु,

जमना जी के तीर राम की सु.....

मान सिंह न पूछ लिऐ थी कटी समाई हो जा गी,

लख्मी चन्द न पूछ लिऐ थारी मन की चाही हो जा गी,

मांगे राम न पूछ लिये थारी सहम लड़ाई हो जा गी,

ओ ओ ओ,,, घरबारी बने फकीर राम की सु,

जमना जी के तीर राम की सु.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।