मेरी है साधना कृष्ण कृष्ण

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी है साधना कृष्ण कृष्ण,

मेरी आराधना कृष्ण कृष्ण,

मेरा है सहारा कृष्ण मुझे खुद से भी प्यारा है कृष्ण,

पलकों में समाना कृष्ण कृष्ण,

हृदय में उतरना कृष्ण कृष्ण,

मुझे छोड़ ना जाना कृष्ण,

मुझे चरणों से लगा ना कृष्ण,

रग रग में रंग तेरा भर दे,

कण-कण में संग तेरा भर दे,

मुझे प्यार दे एतबार दे

तुझ में है डूब जाना मेरे,

ओ मेरे सांवरे मुझे भूल न जाना, कान्हां भूल....

मेरी भी तमन्ना हरी तुमसे दो बातें करूं,

तुम हो मेरे साथ ही एहसास तेरा करूं,

तुझको निहारु मैं तो तुझको पुकारू मैं तो,

दिल में हमारे हो तेरा ही ठिकाना,

ओ मेरे सांवरे मुझे भूल न जाना, कान्हां भूल....

कृष्ण कृष्ण कहते कहते सांस टूट जाएगी,

याद कुछ ऐसी दो ना

तू ही तू ही कहते-कहते मैं भी छूट जाएगी,

प्रीत कुछ ऐसी दो ना

उड़ती है दिल में आहे आनंद भी इतना चाहे,

तेरा करम तेरी शरण हमको तू पहुंचाना,

ओ मेरे सांवरे मुझे भूल न जाना, कान्हां भूल....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।