पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान

लखबीर सिंह लक्खा
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान,

खाटु वाले श्याम धणी जी,

खाटु वाले श्याम प्रभु जी,

रखियो मेरा मान,

पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान,

खाटु वाले श्याम धणी जी,

खाटु वाले श्याम प्रभु जी,

रखियो मेरा मान,

पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान ॥

केसरिया रंग की मैंने ध्वजा बनाई,

गोटा किनारी लगा खूब सजाई,

मंदिर शिखर पे तेरे आके चढ़ाई,

पावन पताका तेरी ऊँची फहराई,

लीले वाले श्याम प्रभु जी,

लीले वाले श्याम प्रभु जी,

धरु चरण में ध्यान,

पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान ॥

त्रिभुवन के दाता बैठे श्याम बाबा बनके,

श्रद्धा भक्ति के भूखे भूखे ना धन के,

काट देते है फंदा आवागम के,

भक्त है फूल बाबा तेरे चमन के,

शीश झुकाकर है बन जाते,

शीश झुकाकर है बन जाते,

निर्धन भी धनवान,

पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान ॥

अपने घर में जो तेरी ज्योत जगाता,

घर हो पवित्र उसका वो दुःख ना पाता,

‘राजपाल’ महिमा लिखके तुझको रिझाता,

तेरी दया से ‘लख्खा’ कीर्तन में गाता,

शीश के दानी वीर लसानी,

शीश के दानी वीर लसानी,

हम है तेरी संतान,

पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान ॥

खाटु वाले श्याम धणी जी,

खाटु वाले श्याम प्रभु जी,

रखियो मेरा मान,

पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान,

खाटु वाले श्याम धणी जी,

खाटु वाले श्याम प्रभु जी,

रखियो मेरा मान,

पैदल मैं आया हूँ तेरे लेके निशान॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।