पवनसुत राम के प्यारे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

पवनसुत राम के प्यारे हो,

पवनसुत राम के प्यारे हो, ये कहती दुनियाँ सारी है,

तेरे जैसा और ना कोई, संकट हारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो,

पवनसुत राम के प्यारे हो, ये कहती दुनियाँ सारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो…….

कोई माँगे धन और दौलत, कोई चाँदी कोई सोना,

कोई आके माँगे तुमसे,

लाला एक सलोना,

कोई माँगे धन और दौलत, कोई चाँदी कोई सोना,

कोई आके माँगे तुमसे,

लाला एक सलोना,

सबकी इच्छा पूरी करते, महिमा थारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो, ये कहती दुनियाँ सारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो……….

हे बजरंगी तेरे दर पे, झुकते ज्ञानी ध्यानी,

जिसने तेरी अर्ज लगाई,

उसके मन की जानी

हे बजरंगी तेरे दर पे, झुकते ज्ञानी ध्यानी,

जिसने तेरी अर्ज लगाई,

उसके मन की जानी,

केसरी नन्दन तेरे द्वार की, सोभा न्यारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो, ये कहती दुनियाँ सारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो……

एक बात पे तुमने हनुमत, सीना फाड़ दिखाया,

राम सिया और लक्ष्मण जी,

तीनो का दरस कराया,

एक बात पे तुमने हनुमत, सीना फाड़ दिखाया,

राम सिया और लक्ष्मण जी,

तीनो का दरस कराया,

तीन लोक में और ना तुमसा, कोई बलकारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो, ये कहती दुनियाँ सारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो…..

सीता जी के परम लाडले, हो अंजनी के लाला,

भूलन त्यागी कहे सदा,

तुम भक्तो पे कृपाला,

सीता जी के परम लाडले, हो अंजनी के लाला,

भूलन त्यागी कहे सदा,

तुम भक्तो पे कृपाला,

तेरे सारे भक्त कहे, तेरी नीला न्यारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो, ये कहती दुनियाँ सारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो,

तेरे जैसा और ना कोई, संकट हारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो,

पवनसुत राम के प्यारे हो, ये कहती दुनियाँ सारी है,

पवनसुत राम के प्यारे हो…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।