जपूँ हर पल मैं तेरा नाम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जपूं हर पल मैं तेरा नाम,

जपूं हर पल मैं तेरा नाम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम,

मेरे तीर्थ तू ही चारों धाम,

मेरे तीर्थ तू ही चारों धाम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम।

जब भी गिरा मैं मझको तूने उठाया,

तुझको पुकारा और तू दौड़ा आया,

जब भी गिरा मैं मझको तूने उठाया,

तुझको पुकारा और तू दौड़ा आया,

तू दौड़ा आया तू दौड़ा आया,

मेरी सुबह तू ही मेरी श्याम,

मेरी सुबह तू ही मेरी श्याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम।

मेरे तीर्थ तू ही चारों धाम,

मेरे तीर्थ तू ही चारों धाम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम।

मुरली मनोहर गोविंद प्यारे,

तुम हो मेरी आँखों के तारे,

मुरली मनोहर गोविंद प्यारे,

तुम हो मेरी आँखों के तारे,

आंखों के तारे आंखों के तारे,

तुम्हें देखूं मैं आठों याम,

तुम्हें देखूं मैं आठों याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम।

मेरे तीर्थ तू ही चारों धाम

मेरे तीर्थ तू ही चारों धाम

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम।

सुन लो मेरे श्याम मुरारी,

तुमसे यही है विनती हमारी,

सुन लो मेरे श्याम मुरारी,

तुमसे यही है विनती हमारी,

विनती हमारी विनती हमारी,

तेरे चरणों में निकलें प्राण,

तेरे चरणों में निकलें प्राण,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम।

मेरे तीर्थ तू ही चारों धाम,

मेरे तीर्थ तू ही चारों धाम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम,

मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।