अब तो आजा प्रभु की शरण में

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॥ पावन पाठ ॥

अब तो आजा प्रभु की शरण में,

तेरी दो दिन की है जिंदगानी,

मन का पंसी है चंचल प्राणी,गहरी नदियाँ है नाव पुराणी,

मोह माया में फस के गाफिल तूने विरथा समय सब गवाया,

जोश में ना तू होश गवाना,ये सदा न रहे गी जवानी,

अब तो आजा प्रभु की शरण में.........

तेरी डोले है जीवन की नैया,

करदो उसको प्रभु के हवाले,

हाथ पतवार है उसी के पार उसको ही है ये लगानी,

अब तो आजा प्रभु की शरण में..

काल का तेरे सिर पे है पहरा,

खोफ तुझको जरा भी नही है,

क्यों तू करता है अभिमान बंदे,

सारी दुनिया है बस आनी जानी,

अब तो आजा प्रभु की शरण में....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।