चिटी चांदनी ते मारे लिष्कारे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चिटी चांदनी ते मारे लिष्कारे,

सोहना दर सतगुरा दा.....

दवारा गुरा दा सब तो सोहना,

सवर्ग वी इसदे वर्गा ना होना,

उत्थे लगदे ने अंबरा दे तारे,

सोहना दर सतगुरा दा,

चिटी चांदनी.........

गुरा दे दवारे दिया सोहनिया ने राहा,

हर पल चलदिया ठंडिया हवावा,

सानू मिल्या है सतुगुरु प्यारा,

सोहना दर सतगुरा दा,

चिटी चांदनी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।