जीवन दा मैनू आनंद आ गया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जीवन दा मैनू आनंद आ गया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया....

हस्सा गावां खुशियाँ मनावा,

असली खज़ाने नू हथ पा लया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया,

जीवन दा मैनू आनंद आ गया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया.....

नैया मेरी डगमग डोले,

बेड़ी दा बन के मल्लाह आ गया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया,

जीवन दा मैनू आनंद आ गया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया.....

सतगुरु स्वामी अन्तर्यामी,

संगता दे विच खुदा आ गया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया,

जीवन दा मैनू आनंद आ गया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया......

ना रेहा दुख ना रही उदासी,

पता नइयो केहड़ी दवा दे गया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया,

जीवन दा मैनू आनंद आ गया,

जदो दा मैं एह शहनशाह पा लया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।