बाबा का रंग चढ़ गया

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सालासर गयी थी बाबा का रंग चढ़ गया,

बाबा जी पै गई थी बाबा का रंग चढ़ गया……..

सास न मैं ले गई हे सुसरा भी संग चढ़ गया,

सास धोक मारे हे सुसर तो मुद्दा पड़ गया,

पड़ गया पड़ गया पड़ गया हे सालासर रुक्का पड़ गया……..

जेठानी न मैं ले गई हे जेठा भी गैल्या चढ़ गया,

जेठानी धोक मारे हे जेठ तो मुद्दा पड़ गया,

पड़ गया पड़ गया पड़ गया हे सालासर रुक्का पड़ गया……..

दोराणी न मैं ले गई हे देवर भी गैल्या चढ़ गया,

जेठानी धोक मारे हे जेठ तो मुद्दा पड़ गया,

पड़ गया पड़ गया पड़ गया हे सालासर रुक्का पड़ गया……..

नंदी न मैं ले गई हे नन्दोंईया गैल्या चढ़ गया,

नंदी धोक मारे हे नन्दोंईया तो मुद्दा पड़ गया,

पड़ गया पड़ गया पड़ गया हे सालासर रुक्का पड़ गया……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।