तेरा दर है साईं

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॥ पावन पाठ ॥

तेरा दर है साईं बड़ा दर तेरे पे मैं वारी जाऊ,

तेरे दर के लिए है मेरा सिर तेरे दर पे मैं वारी जाऊ

तेरी जननत वाली है टोली,तेरी वरकत वाली है झोली,

तेरी रहमत वाली है चादर तेरे दर पे मैं वारी जाऊ,

तेरा दर है साईं ......

मेरा साईं मेरा मनमोहन है तेरे प्यार से मेरा जीवन है,

जाऊ मैं कहा उठ कर के जहा से,

तेरा दर है साईं ......

ये बन्दा दुःख का मारा है मेरा कोई नही सहारा है,

श्रधा सबुरी का साईं सागर तेरे दर पे मैं वारी जाऊ,

तेरा दर है साईं.......

तेरी चोकाथ की साईं जन्नत को भी ठुकरा दू गा,

तेरे चरणों में सब कुछ है बाबा तेरे दर पे मैं वारी जाऊ,

तेरा दर है साईं .........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।