जब जब भी संकट का मुझपे फेरा होता है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

जब जब भी संकट का मुझ पे फेरा होता है,

मेरे दरवाज़े पे हनुमान का पेहरा होता है…….

जब से आए घर में मेरे सारे संकट भाग गए,

हम तो डो थे गहरी नींद में हनुमान जी जाग रहे,

हर गली हर कूचे में इनका बसेरा होता है,

मेरे दरवाज़े पे हनुमान का पेहरा होता है…….

मुझसे ज़्यादा चिंता करते ये मेरे परिवार की,

करते हैं रखवाली हर दम ये मेरे घर बार की,

जपते जपते नाम इन्ही का सवेरा होता है,

मेरे दरवाज़े पे हनुमान का पेहरा होता है…….

श्री राम का सेवक है ये भक्तों का रखवाला है,

इनकी महिमा बहुत बड़ी है इनका खेल निराला है,

भक्तों से भगवान का रिश्ता गहरा होता है,

मेरे दरवाज़े पे हनुमान का पेहरा होता है…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।