चाहे नचालो मैया अपने दरबार में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चाहे नचालो मैया अपने दरबार में,

हमको नचाना न माँ जूठे संसार में……..

जिसने तुम पर किया भरोसा फल उसने ही पाया,

मैया तेरीशान निराली अजब निराली माया,

अजब निराली लीला तेरी कोई समझ ना पाया,

काटे जाए सारा जीवन तेरे ही प्यार में,

मुझको नचाना न माँ जूठे संसार में……….

तेरी ही बन के पुजारिन अब तो मुझको जीना,

तू ही मेरी भाग्यविद्याता छूटे साथ कभी भी ना,

तेरे होते न डुभे नाइयाँ मजधार में,

मुझको नचाना न माँ जूठे संसार में……..

जग जननी माँ महिमा तुम्हारी राखियों लाज हमारी,

दूर करो माँ कष्ट माँ आयी शरण तिहारी,

जीवन कट जाए मेरा तेरे दरबार में,

मुझको नचाना न माँ जूठे संसार में…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।