आज मेरी मैया को किसने सजा दिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज मेरी मैया को किसने सजा दिया,

किसने सजा दिया किसने सजा दिया,

जिसने भी जय हो जिसने भी,

जिसने भी देखा कहा दुल्हन बना दिया,

आज मेरी मैया को किसने सजा दिया……..

चंदा जैसा मुखड़ा माँ का बिंदिया करे उजाला रे,

किसने ये जय हो,

किसने ये आज माँ को सिंदूर लगा दिया,

आज मेरी मैया को किसने सजा दिया……..

कानों में झुमके माँ के नाक में नथनीयां है,

होठो पे लाली माँ के आँखों में कजरा है,

किसने ये जय हो,

किसने ये आज माँ को गजरा पहना दिया,

आज मेरी मैया को किसने सजा दिया……..

गले में हरवा माँ के हाथों में कंगना है,

हाथों में कंगना माँ के हाथों में मुन्दरी है,

किसने ये जय हो,

किसने ये आज माँ के हाथों को सजा दिया,

आज मेरी मैया को किसने सजा दिया……..

कमर पे तगड़ी माँ के पैरों में पायल है,

पैरों में पायल माँ के पैरों में बिछुवे है,

किसने ये जय हो,

किसने ये आज माँ को महावर लगा दिया,

आज मेरी मैया को किसने सजा दिया……..

अंगो में लहंगा माँ के अंगों में चोली है,

किसने ये जय हो,

किसने ये आज माँ को चुनरी ओढा दिया,

आज मेरी मैया को किसने सजा दिया……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।