मैं तो व्रत करूंगी गुड़गांवा के मेले में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अरी री मैं तो व्रत करूंगी गुड़गांवा के मेले में,

गुड़गांवा के मेले में शीतला के मेले में,

अरी री पीलो सो झंडा मैया के मेले में,

अरी री मैं तो व्रत करूंगी गुड़गांवा के मेले में.....

वो आई वो आई मेरी मात शीतला वो आई,

ले आओ ले आओ कोई जल के लोटे के आओ,

अरे रे मैया को निल्हादो,

हो दाती को निल्हादो,

सोमवार के मेले में,

अरी री मैं तो व्रत करूंगी गुड़गांवा के मेले में.....

अरे वो आई वो आई मेरी मात मसानी वो आई,

ले आओ ले आओ मेरी मा के लड्डू ले आओ,

अरे री मैया को चढ़ादो,

दाती को खिला दो,

बुधवार के मेले में,

अरी री मैं तो व्रत करूंगी गुड़गांवा के मेले में......

वो आई वो आई मेरी मात कालका वो आई,

ले आओ ले आओ मेरी मा के बकरे ले आओ,

ले आओ ले आओ कोई काला बकरा ले आओ,

अरे री काली पे चढ़ा दो,

अब्ला पे चढ़ा दो शनिवार के मेले में,

अरी री मैं तो व्रत करूंगी गुड़गांवा के मेले में......

वो आई वो आई मेरी मात कसुमी वो आई,

ले आओ ले आओ मैया के बताशे ले आओ,

अरे री दाती पे चढ़ा दो,

शनिवार के मेले में,

अरी री मैं तो व्रत करूंगी गुड़गांवा के मेले में.....

अरे वो आए वो आए मेरे सैयद बाबा वो आए,

वो आए वो आए मेरे जैन के बाबा वो आए,

ले आओ ले आओ बाबा कि चादर ले आओ,

ले आओ ले आओ कोई खील बताशे ले आओ,

अरे री पीरो के चढ़ा दो वीरवार के मेले में,

अरी री में तो व्रत करूंगी गुड़गांवा के मेले में.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।