हलवे का प्रसाद बनाया मैया रानी का

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ये ले सूजी ये ले मीठा लोटा पानी का,

हलवे का प्रसाद बनाया मैया रानी का……..

हवले चने का भोग बनाया,

सबसे पहले माँ को जिमाया,

मैं चरणों का दास मेरी मैया रानी का,

हलवे का प्रसाद बनाया मैया रानी का……..

मैया बिन कुछ नही मेरे धोरे,

मैया रहवे सदा मेरे ओरे धोरे,

मैं सू सच्चा सेवक उस लाड लडाणी का,

हलवे का प्रसाद बनाया मैया रानी का……..

मैया रानी मेरे घर आई,

देसी घी का करू कढाई,

सुन लुंगी बोल उसकी मीठी वाणी का,

हलवे का प्रसाद बनाया मैया रानी का……..

भगत मण्डली भजन में आवे,

गा गा के नै माँ नै रिझावे,

तीन लोक ने लिया सहारा मैया रानी का,

हलवे का प्रसाद बनाया मैया रानी का……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।