तू ही मेरी बन्दगी है तू ही हर खुशी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

और नहीं कुछ, मांगू मां तुमसे, इतना करम करना,

मुझको तू हर पल, अम्बे भवानी, अपनी शरण रखना,

मैंने तेरे नाम सारी जिंदगी लिखी,

तू ही मेरी बन्दगी है तू ही हर खुशी,

मेरी मां, मेरी माँ,कोई नहीं मेरा यहां,

मेरी माँ तेरा दर, मेरा घर है मेरा जहां,

तेरे नाम मैंने सारी जिंदगी लिखी,

तू ही मेरी बन्दगी है तू ही हर खुशी….

मां तुमने मेरा, दूर किया हर गम,

तुमने ही बक्शा, खुशियों का मौसम,

कोई नहीं था, मेरा जहां में, तुमने सहारा दिया,

डूब रही थी, कश्ती ये मेरी, तुमने किनारा दिया,

मैंने तेरे नाम सारी जिंदगी लिखी,

तू ही मेरी बन्दगी है तू ही हर खुशी,

और नहीं कुछ,मांगू माँ तुमसे…….

मेरी ये सांसे, मेरी ये धड़कन,

तेरी दया से ही, है मेरा जीवन,

रहमत से तेरी, मुझको मिला है, जीवन दुबारा मां,

तूने बदल दी, मेरी ये किस्मत देकर सहारा माँ,

मैंने तेरे नाम सारी जिंदगी लिखी,

तू ही मेरी बन्दगी है तू ही हर खुशी,

और नहीं कुछ मांगू……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।