मैया मुझे बुलाए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भवन दरबार सजाए मैया मुझे बुलाए,

हो...

दरस बिना दिल मेरा तड़पा तड़पाये,

भवन दरबार सजाए ओ मैया मुझे बुलाए,

आए हर साल बुलावे ओ ओ, ना इक पल मुझे बुलावे,

मेर माँ मेरी माँ मेरी माँ भवन दरबार सजाए ओ मैया मुझे बुलाए.....

चले एक होके हम माँ के दर पे छोड़ो गम,

छोड़ो आँखो के ये नम और उदासी रे,

ये है अंगना का धाम मन में एक ही है नाम,

आंखे मैया के दरस को प्यासी रे,

दर्शन को आए हैं हम, हो हो, मेरी माँ मेरी माँ हो,

भवन दरबार सजाए ओ मैया मुझे बुलाए……

मँझधार में फँसा है पतवार में फंसा है,

रफ्तार में फँसा है संसार की,

छोड़ मोहमाया जग की मिट्टी मिली काया सबकी,

बनी देख साया जग की जोता वालिए,

मन में जला दे जोति हो मेरी माँ मेरी माँ हो,

भवन दरबार सजाए ओ मैया मुझे बुलाए…………

खड़े द्वार पे तुम्हारे सारे भक्त भोले भाले,

कर दो सुख के उजाले मेरी दातिए,

ऊंचे धाम में विराजी मेरी मैया शेरोंवाली,

भर्ती सबकी झोली खाली मेहरा वाली,

करती मुरादें पूरी हो मेरी माँ मेरी माँ हो,

भवन दरबार सजाए ओ मैया मुझे बुलाए……

आए हर साल बुलावे ओ ओ, ना इक पल मुझे बुलावे,

मेर माँ मेरी माँ मेरी माँ भवन दरबार सजाए ओ मैया मुझे बुलाए……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।