तेरे दर पे आ गए हैं अब दूर नहीं जाना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे आ गए हैं अब दूर नहीं जाना,

दामन पकड़ा तेरा कहीं और नहीं जाना……….

बिगड़ी तक़दीरों को मैय्या आप बनाते हो,

डूबी हुई नैय्या को मैय्या आप उठाते हो,

मेरा ये जीवन दाती चरणो में लग जाऊँ,

तेरे दर पे आ गए हैं अब दूर नहीं जाना…..

ये जाम मोहब्बत का जो कोई पी लेता है,

भूल जाता है ग़म सारे मस्ती में जी लेता,

मस्ती उतरती ही नहीं नशा चढ़ के उतर जाता,

तेरे दर पे आ गए हैं अब दूर नहीं जाना......

तस्वीर तेरी दाती मेरे मन में बस गयी है,

तेरी राह मेरी दाती रोम रोम में बस गयी है,

जब ताल से ताल बजे तब रुका नहीं जाता,

तेरे दर पे आ गए हैं अब दूर नहीं जाना……

ये प्यार का सौदा है निर्धन की बाज़ी है,

कोई माने या ना माने मेरी मैय्या राज़ी है,

जब उठे हिलोरे माँ तब रुका नहीं जाता,

तेरे दर पे आ गए हैं अब दूर नहीं जाना…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।