नैया पार लगा दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नैया पार लगा दे, मैया पार कर दे,

नैया डूबी है मझधार मैया पार कर दे……….

टूटी टूटी नैया किस पार है,

तेरे बिन मैया सहारा किस का,

नैया पार लगा दे, मैया पार कर दे……..

चरणों में आयी दाती अर्ज़ सुन ले,

फल और शृंगार ये क़ुबूल कर ले,

नैया पार लगा दे, मैया पार कर दे……..

हीरे और मोतियों की लोढ़ कोई ना,

तेरे बिन दातीए और कोई ना,

नैया पार लगा दे, मैया पार कर दे……..

माया वाली दाती ज़ंजीर तोड़ दे,

भागाँ वाली गठरी एक बार खोले दे,

नैया पार लगा दे, मैया पार कर दे………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।