खोल दे खजाने माँ निहाल कर दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुझको भी मैया मालामाल करदे,

निहाल कर दे मालामाल करदे…....

सबको तू कोठी और कार बांटे,

काहे ना मैया मेरी और झाके,

मेरा भी दूर माँ मलाल कर दे,

मुझको भी मैया मालामाल करदे,

खोल दे खजाने माँ निहाल कर दे………

किस्मत तू मेरी भी दे सवार माँ,

अच्छा सा दे दे मुझे कारोबार माँ,

कोई तो ऐसा कमाल कर दे,

मुझको भी मैया मालामाल करदे,

खोल दे खजाने माँ निहाल कर दे………

जो भी मुझे देखे वही सेठ बोले,

नोटों के भर भर के आये झोले,

मेरा भी पूरा सवाल कर दे,

मुझको भी मैया मालामाल करदे,

खोल दे खजाने माँ निहाल कर दे………

करती हो माँ काहे सेवा विचार,

कर दो मैहर मैया बस एक बार,

सिर पे माँ हाथ एक बार रख दे,

मुझको भी मैया मालामाल करदे,

खोल दे खजाने माँ निहाल कर दे………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।