माँ सजाने में आनन्द आता है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तुम सजती रहो हम सजाते रहे,

माँ सजाने में आनंद आता है......

तुम रोली बनो हम पानी बने,

घुल जाने में आनंद आता है,

माँ सजाने में आनंद आता है,

तुम सजती रहो हम सजाते रहे......

तुम दीपक बनो हम बाती बने,

लौ लगाने में आनंद आता है,

माँ सजाने में आनंद आता है,

तुम सजती रहो हम सजाते रहे......

तुम सागर बनी हम लहरें बने,

डूब जाने में आनंद आता है,

माँ सजाने में आनंद आता है,

तुम सजती रहो हम सजाते रहे......

तुम चंदा बनो हम चकोरी बने,

दिल लगाने में आनंद आता है,

माँ सजाने में आनंद आता है,

तुम सजती रहो हम सजाते रहे......

तुम मैया बनो हम बेटी बने,

माँ बुलाने में आनंद आता है,

माँ सजाने में आनंद आता है,

तुम सजती रहो हम सजाते रहे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।