शेरावाली के रुप अनेक

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे,

प्यारी लगे मईया दिल में बसे,

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे....

जब मैया दुर्गा बन आयी,

दुर्गा बन आयी माँ दुर्गा बन आयी,

उसकी सेवा में हनुमत खड़े जगत को प्यारी लगे,

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे.....

जब मैया काली बन आयी,

काली बन आयी माँ काली बन आयी,

और राक्षस मारे अनेक जगत को प्यारी लगे,

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे.....

जब मैया ज्वाला बन आयी,

ज्वाला बन आयी माँ ज्वाला बन आयी,

देखो घर घर में ज्योत जले जगत को प्यारी लगे,

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे.....

जब मैया गौरा बन आयी,

गौरा बन आयी माँ गौरा बन आयी,

भोले के खुल गए नेत्र जगत को प्यारी लगे,

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे.....

जब मैया गौमाता बन आयी,

गौमाता बन आयी माँ गौमाता बन आयी,

सेवा करें सब देव जगत को प्यारी लगे,

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे......

जब मैया तुलसा बन आयी,

तुलसा बन आयी माँ तुलसा बन आयी,

देखो घर-घर में दीप जले जगत को प्यारी लगे,

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे......

जब मैया कल्याणी बन आयी,

कल्याणी बन आयी माँ कल्याणी बन आयी,

भक्तों के कलेश कटे जगत को प्यारी लगे,

शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।