श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम

पारंपरिक
महादेव स्तोत्र दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय जय माँ

जय जय जय जय माँ

जय जय जय जय माँ

जय जय माँ ||

निशुम्भ शुम्भ गर्जनी

प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी |

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी ||

त्रिशूल मुण्ड धारिणी

धरा विघात हारिणी |

गृहे गृहे निवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी ||

दरिद्र दुःख हारिणी

सदा विभूति कारिणी |

वियोग शोक हारिणी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी ||

लसत्सुलाल लोचनं

लतासनं वरप्रदं |

कपाल-शूल धारिणी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी ||

कराब्जदानदाधरां

शिवाशिवां प्रदायिनी |

वरा- वराननां शुभां

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी ||

कपीन्द्र जामिनीप्रदां

त्रिधा स्वरुप धारिणी |

जले-स्थले निवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी ||

विशिष्ट शिष्ट कारिणी

विशाल रूप धारिणी |

महोदरे विलासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी ||

पुरंदरादि सेवितां

पुरादिवंशखण्डिताम् |

विशुद्ध बुद्धकारिणी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी

भजामि विंध्यवासिनी ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।