आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी,

आई मै तोरे अंगना माँ भवानी,

पड़ी है संकट में हो,

पड़ी है संकट में ये जिंदगानी,

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी ॥

बनालो मुझे दासी अपने घर की,

बनालो मुझे दासी अपने घर की,

यही है मेरी लालसा हो,

यही है मेरी लालसा हो मातारानी,

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी ॥

चंदा ऐसा मुखड़ा चम चम चमके,

चंदा ऐसा मुखड़ा चम चम चमके,

मैया तेरी चुनरी हो,

मैया तेरी चुनरी हो लासानी,

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी ॥

खड़े सब तेरे आके द्वारे,

खड़े सब तेरे आके द्वारे,

दया हो मेरी मैया हो,

दया हो मेरी मैया हो तू है दानी,

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी ॥

यही एक विनती सुन लो मेरी,

यही एक विनती सुन लो मेरी,

दरश मुझे दे दो हो,

दरश मुझे दे दो हो माँ भवानी,

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी ॥

देखा है तेरी लीला कंस पापी,

देखा है तेरी लीला कंस पापी,

अमर तेरी मैया हो,

अमर तेरी मैया है कहानी,

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी ॥

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी,

आई मै तोरे अंगना माँ भवानी,

पड़ी है संकट में हो,

पड़ी है संकट में ये जिंदगानी,

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।