मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी,

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी,

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी...

कईया निर्धना दे मैया भरे ने भंडारे तू,

जिन्हा याद किता ओदे कष्ट निवारे तू,

तैनू छड्ड कीदे अग्गे करा मैं पुकार नी,

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी.....

तेरी शक्ति बिना सूना सारा संसार है,

बिना कार ब्रह्म विच माया ही साकार है,

माँ किसे वी ना पाया तेरी शक्ति दा पार नी,

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी.....

ममता च फसेया दा बेड़ा बन्ने लाओ माँ,

दिने राती याद करां किसे वेले आओ माँ,

सबदा भरोसा छड्ड डिगा तेरे द्वार नी,

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी......

देवते वी औखे वेले माँ तैनू ही ध्यावन्दे,

जंगला पहाड़ा विच तेरे गुण गांवन्दे,

औना लई आउंदी रही तू पवन रूप धार नी,

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी......

ऊँचीया गला नु मैया तेरे बिना जाने कौन,

तेरे वाजो दुख मेरा जननी पहचाने कौन,

तैनू छड्ड किदे अग्गे करां मैं पुकार नी,

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी......

चिन्तपुर्णि ज्वाला तुहियो चण्डी महाकाली तू,

जीवे कर सके कर चमन दी रखवाली तू,

मैनु वी निमाणे नु दे अपना दीदार नी,

मेरी भी पुकार सुन अम्बे जग तारणी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।